وَلَا تَمۡشِ فِي ٱلۡأَرۡضِ مَرَحًاۖ إِنَّكَ لَن تَخۡرِقَ ٱلۡأَرۡضَ وَلَن تَبۡلُغَ ٱلۡجِبَالَ طُولٗا ٣٧
और धरती पर अकड़कर न चलो। निःसंदेह न तुम धरती को फाड़ सकोगे और न लंबाई में पर्वतों तक पहुँच सकोगे।
तफ़सीर
तथा धरती पर घमंड करते और इतराते हुए मत चलो। यदि तुम उसपर अकड़ कर चलोगे, तो तुम अपनी चाल से कभी न धरती को फाड़ सकोगे, और न ही तुम्हारा क़द कभी पहाड़ों की लंबाई और ऊँचाई तक पहुँचेगा। तो फिर घमंड क्यों?!