وَقُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي لَمۡ يَتَّخِذۡ وَلَدٗا وَلَمۡ يَكُن لَّهُۥ شَرِيكٞ فِي ٱلۡمُلۡكِ وَلَمۡ يَكُن لَّهُۥ وَلِيّٞ مِّنَ ٱلذُّلِّۖ وَكَبِّرۡهُ تَكۡبِيرَۢا ١١١
तथा कहो : सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने (अपने लिए) कोई संतान नहीं बनाई, और न राज्य में उसका कोई साझी है, और न विवशता (कमज़ोरी) के कारण उसका कोई मददगार है। और आप उसकी पूर्ण महिमा का गान करें।
तफ़सीर
और आप (ऐ रसूल) कह दीजिए : सब प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जो हर प्रकार की प्रशंसाओं और स्तुतियों के योग्य है, जो संतान से पवित्र है और जो साझी से पवित्र है। अतः उसके राज्य में कोई उसका साझी नहीं है। उसे अपमान और बेइज़्ज़ती छू भी नहीं सकती। इसलिए उसे किसी सहायक की आवश्यकता नहीं, जो उसका समर्थन करे और उसे प्रतिष्ठा प्रदान करे। और आप बहुत अधिक उसकी महिमा का गान करें। अतः आप उसकी ओर संतान, या राज्य में साझी, या मददगार समर्थक की निस्बत न करें।