सूरह Al-Isra, आयत 101

17:101

وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَىٰ تِسۡعَ ءَايَٰتِۭ بَيِّنَٰتٖۖ فَسۡـَٔلۡ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ إِذۡ جَآءَهُمۡ فَقَالَ لَهُۥ فِرۡعَوۡنُ إِنِّي لَأَظُنُّكَ يَٰمُوسَىٰ مَسۡحُورٗا ١٠١

और निश्चय हमने मूसा को नौ स्पष्ट निशानियाँ60 दीं। अतः आप बनी इसराईल से पूछ लें, जब वह (मूसा) उनके पास आए, तो फ़िरऔन ने उनसे कहा : ऐ मूसा! मैं समझता हूँ कि तुझपर जादू कर दिया गया है।

फ़ुटनोट

60 वे नौ निशानियाँ निम्नलिखित थीं : हाथ की चमक, लाठी, अकाल, तूफ़ान, टिड्डी, जूएँ, मेंढक, खून और सागर का दो भाग हो जाना।

तफ़सीर

निश्चित रूप से हमने मूसा अलैहिस्सलाम को नौ स्पष्ट निशानियाँ दीं, जो उनकी सत्यता की गवाही देती थीं और वे निशानियाँ : लाठी, हाथ, अकाल, फलों की कमी, आँधी (तूफान), टिड्डियाँ, जूँ, मेंढक और खून हैं। तो आप (ऐ रसूल) यहूदियों से पूछ लीजिए कि जब मूसा अलैहिस्सलाम उनके पूर्वजों के पास उन निशानियाँ को लेकर आए, तो फ़िरऔन ने उनसे कहा : मैं निश्चय ही (ऐ मूसा) तुम्हें एक जादू किया हुआ आदमी समझता हूँ; क्योंकि तुम ये अजब-गजब (विचित्र) चीज़ें लाते हो।