فَلَآ أُقۡسِمُ بِٱلشَّفَقِ ١٦
मैं क़सम खाता हूँ शफ़क़ (सूर्यास्त के बाद की लाली) की।
तफ़सीर
अल्लाह ने उस लाली की क़सम खाई है, जो सूर्यास्त के बाद क्षितिज पर होती है।
فَلَآ أُقۡسِمُ بِٱلشَّفَقِ ١٦
मैं क़सम खाता हूँ शफ़क़ (सूर्यास्त के बाद की लाली) की।
अल्लाह ने उस लाली की क़सम खाई है, जो सूर्यास्त के बाद क्षितिज पर होती है।