وَإِذۡ أَخَذَ ٱللَّهُ مِيثَٰقَ ٱلنَّبِيِّـۧنَ لَمَآ ءَاتَيۡتُكُم مِّن كِتَٰبٖ وَحِكۡمَةٖ ثُمَّ جَآءَكُمۡ رَسُولٞ مُّصَدِّقٞ لِّمَا مَعَكُمۡ لَتُؤۡمِنُنَّ بِهِۦ وَلَتَنصُرُنَّهُۥۚ قَالَ ءَأَقۡرَرۡتُمۡ وَأَخَذۡتُمۡ عَلَىٰ ذَٰلِكُمۡ إِصۡرِيۖ قَالُوٓاْ أَقۡرَرۡنَاۚ قَالَ فَٱشۡهَدُواْ وَأَنَا۠ مَعَكُم مِّنَ ٱلشَّٰهِدِينَ ٨١
तथा (याद करो) जब अल्लाह ने सब नबियों से दृढ़ वचन लिया कि मैं किताब और हिकमत में से जो कुछ तुम्हें दूँ, फिर तुम्हारे पास कोई रसूल आए जो उसकी पुष्टि करने वाला हो जो तुम्हारे पास है, तो तुम उसपर अवश्य ईमान लाओगे और अवश्य उसका समर्थन करोगे। (अल्लाह ने) कहा : क्या तुमने स्वीकार किया और उसपर मेरी प्रतिज्ञा क़बूल की? उन्होंने कहा : हमने स्वीकार कर लिया। (अल्लाह ने) कहा : तो तुम गवाह रहो और मैं भी तुम्हारे साथ गवाहों में से हूँ।43
फ़ुटनोट
43 भावार्थ यह है कि जब आगामी नबियों को ईमान लाना आवश्यक है, तो उनके अनुयायियों को भी ईमान लाना आवश्यक होगा। अतः अंतिम नबी मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाना सभी के लिए अनिवार्य है।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब अल्लाह ने सभी नबियों से यह कहते हुए दृढ़ वचन लिया कि मैं तुम्हें जो भी पुस्तक दूँ, तथा तुम्हें जो भी हिकमत सिखाऊँ और तुममें से कोई जिस भी स्थान और पद पर पहुँच जाए, फिर तुम्हारे पास मेरी ओर से एक नबी आए (और वह मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं) जो तुम्हारे पास मौजूद किताब और हिकमत की पुष्टि करता हो; तो तुम उसकी लाई हुई बात पर अवश्य ईमान लाओगे और उसका अनुसरण करते हुए अवश्य उसकी मदद करोगे। तो क्या - ऐ नबियो! - तुमने इसका इक़रार कर लिया और उसपर मेरा दृढ़ वचन क़बूल कर लिया? तो उन लोगों ने उत्तर देते हुए कहा : हमने इसका इक़रार किया। अल्लाह ने फरमाया : तुम लोग अपने आपपर और अपने समुदायों पर गवाह रहो, और मैं भी तुम्हारे साथ तुमपर और उनपर गवाहों में से हूँ।