وَدَّت طَّآئِفَةٞ مِّنۡ أَهۡلِ ٱلۡكِتَٰبِ لَوۡ يُضِلُّونَكُمۡ وَمَا يُضِلُّونَ إِلَّآ أَنفُسَهُمۡ وَمَا يَشۡعُرُونَ ٦٩
अह्ले किताब के एक समूह ने चाहा काश! वे तुम्हें पथभ्रष्ट कर दें। हालाँकि वे अपने सिवा किसी को पथभ्रष्ट नहीं कर रहे हैं। और उन्हें इसका एहसास नहीं।
तफ़सीर
ऐ ईमान वालो! अह्ले किताब यानी यहूदियों और ईसाइयों के धर्मगुरु चाहते हैं कि - ऐ ईमान वालो - तुम्हें उस सच्चाई से भटका दें जिसकी अल्लाह ने तुम्हें हिदायत दी है, हालाँकि वे केवल अपने-आप ही को गुमराह कर रहे हैं। क्योंकि उनका ईमान वालों को पथभ्रष्ट करने का प्रयास, स्वयं उन्हीं की गुमराही में वृद्धि करता है और वे अपने कार्यों के परिणामों को नहीं जानते।