सूरह Al-Imran, आयत 169

3:169

وَلَا تَحۡسَبَنَّ ٱلَّذِينَ قُتِلُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ أَمۡوَٰتَۢاۚ بَلۡ أَحۡيَآءٌ عِندَ رَبِّهِمۡ يُرۡزَقُونَ ١٦٩

जो लोग अल्लाह के मार्ग में मारे गए हैं, उन्हें कदापि मृत न समझो, बल्कि वे जीवित94 हैं, अपने पालनहार के पास रोज़ी दिए जाते हैं।

फ़ुटनोट

94 शहीदों का जीवन कैसा होता है? ह़दीस में है कि उनकी आत्माएँ हरे पक्षियों के भीतर रख दी जाती हैं और वे स्वर्ग में चुगते तथा आनंद लेते फिरते हैं। (सह़ीह़ मुस्लिम, ह़दीस : 1887)

तफ़सीर

(ऐ नबी) आप यह मत समझें कि जो लोग अल्लाह की खातिर जिहाद में मारे गए थे, वे मर चुके हैं। बल्कि वे अपने पालनहार के पास उसके सम्मान के घर में एक विशेष जीवन जी रहे हैं, उन्हें विभिन्न प्रकार की ऐसी रोज़ी मिलती रहती है, जिसका ज्ञान केवल अल्लाह को है।