सूरह Al-Furqan, आयत 68

25:68

وَٱلَّذِينَ لَا يَدۡعُونَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَ وَلَا يَقۡتُلُونَ ٱلنَّفۡسَ ٱلَّتِي حَرَّمَ ٱللَّهُ إِلَّا بِٱلۡحَقِّ وَلَا يَزۡنُونَۚ وَمَن يَفۡعَلۡ ذَٰلِكَ يَلۡقَ أَثَامٗا ٦٨

और जो अल्लाह के साथ किसी दूसरे पूज्य34 को नहीं पुकारते, और न उस प्राण को क़त्ल करते हैं, जिसे अल्लाह ने ह़राम ठहराया है परंतु हक़ के साथ और न व्यभिचार करते हैं। और जो ऐसा करेगा, वह पाप का भागी बनेगा।

फ़ुटनोट

34 अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि मैंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से प्रश्न किया कि कौन सा पाप सबसे बड़ा है? फरमाया : यह कि तुम अल्लाह का साझी बनाओ जब कि उसने तुम्हें पैदा किया है। मैंने कहा : फिर कौन सा? फरमाया : अपनी संतान को इस भय से मार दो कि वह तुम्हारे साथ खाएगी। मैंने कहा : फिर कौन सा? फरमाया : अपने पड़ोसी की पत्नी से व्यभिचार करना। यह आयत इसी पर उतरी। (देखिए : सह़ीह़ बुख़ारी : 4761)

तफ़सीर

तथा जो लोग अल्लाह के अलावा किसी अन्य पूज्य को नहीं पुकारते। तथा उस व्यक्ति को क़त्ल नहीं करते, जिसके क़त्ल को अल्लाह ने हराम किया है, सिवाय इसके कि जिसके क़त्ल को अल्लाह ने अधिकृत किया है, जैसे कि हत्यारे, या धर्मत्यागी (मुर्तद्द), या विवाहित व्यभिचारी को क़त्ल करना। तथा वे व्यभिचार नहीं करते हैं। और जो व्यक्ति इन बड़े-बड़े गुनाहों में से कोई गुनाह करेगा, वह क़ियामत के दिन उसकी सज़ा भुगतेगा।