सूरह Al-Furqan, आयत 67

25:67

وَٱلَّذِينَ إِذَآ أَنفَقُواْ لَمۡ يُسۡرِفُواْ وَلَمۡ يَقۡتُرُواْ وَكَانَ بَيۡنَ ذَٰلِكَ قَوَامٗا ٦٧

तथा वे लोग कि जब खर्च करते हैं, तो न फ़िज़ूल-खर्ची करते है और न ख़र्च करने में तंगी करते हैं, और (उनका ख़र्च) इसके बीच में मध्यम होता है।

तफ़सीर

और वे लोग कि जब अपना धन खर्च करते हैं, तो फ़िज़ूलखर्ची की सीमा तक नहीं पहुँचते और जिनपर ख़र्च करने के लिए वे बाध्य हैं, उनपर ख़र्च करने में तंगी नहीं करते हैं। बल्कि खर्च करने के मामले में फ़िज़ूलख़र्ची और कंजूसी के बीच संतुलित राह अपनाते हैं।