وَيَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَنفَعُهُمۡ وَلَا يَضُرُّهُمۡۗ وَكَانَ ٱلۡكَافِرُ عَلَىٰ رَبِّهِۦ ظَهِيرٗا ٥٥
और वे अल्लाह के सिवा उस चीज़ की इबादत करते हैं, जो न उन्हें फ़ायदा पहुँचाती है और न नुक़सान पहुँचाती है और काफ़िर हमेशा अपने पालनहार के विरुद्ध मदद करने वाला है।
तफ़सीर
ये काफ़िर लोग अल्लाह के अलावा उन मूर्तियों की पूजा करते हैं, जो उनकी आज्ञा मानने से उन्हें लाभ नहीं देती हैं और यदि वे उनकी अवज्ञा करते हैं तो उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाती हैं। तथा काफ़िर ऐसे कार्यों में शैतान का अनुयायी है, जो अल्लाह को क्रोधित करते हैं।