فَإِذَا قَضَيۡتُم مَّنَٰسِكَكُمۡ فَٱذۡكُرُواْ ٱللَّهَ كَذِكۡرِكُمۡ ءَابَآءَكُمۡ أَوۡ أَشَدَّ ذِكۡرٗاۗ فَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَقُولُ رَبَّنَآ ءَاتِنَا فِي ٱلدُّنۡيَا وَمَا لَهُۥ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ مِنۡ خَلَٰقٖ ٢٠٠
और जब तुम अपने ह़ज्ज के कार्य पूरे कर लो, तो अल्लाह को याद करो, जैसे अपने बाप-दादा को याद किया करते थे, बल्कि उससे भी बढ़कर याद121 करो। फिर लोगों में से कोई तो ऐसा है जो कहता है : ऐ हमारे पालनहार! हमें दुनिया में दे दे। और आख़िरत में उसका कोई हिस्सा नहीं।
फ़ुटनोट
121 जाहिलिय्यत में अरबों की यह रीति थी कि ह़ज्ज पूरा करने के पश्चात् अपने पूर्वजों के कर्मों की चर्चा करके उनपर गर्व किया करते थे। तथा इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा ने इसका अर्थ यह किया है कि जिस प्रकार शिशु अपने माता पिता को गुहारता, पुकारता है, उसी प्रकार तुम अल्लाह को गुहारो और पुकारो। (तफ़्सीर क़ुर्तुबी)
तफ़सीर
जब तुम ह़ज्ज के कार्य पूरे कर लो और उनसे फारिग़ हो जाओ, तो अल्लाह को याद करो और उसकी अत्यधिक प्रशंसा करो, जैसे तुम अपने बाप-दादा पर गर्व और उनकी प्रशंसा किया करते थे, अथवा अल्लाह को अपने बाप-दादा को याद करने से कहीं बढ़कर याद करो। क्योंकि हर वह नेमत जिसका तुम आनंद ले रहे हो, वह अल्लाह ही की दी हुई है। इस विषय में लोग अलग-अलग प्रकार के हैं। उनमें से एक बहुदेववादी काफ़िर है, जो केवल इस सांसारिक जीवन पर विश्वास करता है। इसलिए वह अपने पालनहार से केवल संसार की नेमतों और उसकी शोभा, जैसे स्वास्थ्य, धन और संतान को माँगता है। ऐसे लोगों के लिए, उनके दुनिया की इच्छा रखने और आख़िरत से उपेक्षा करने के कारण, उसमें कोई हिस्सा नहीं है, जो अल्लाह ने अपने मोमिन बंदों के लिए आख़िरत में तैयार कर रखा है।