لَيۡسَ عَلَيۡكُمۡ جُنَاحٌ أَن تَبۡتَغُواْ فَضۡلٗا مِّن رَّبِّكُمۡۚ فَإِذَآ أَفَضۡتُم مِّنۡ عَرَفَٰتٖ فَٱذۡكُرُواْ ٱللَّهَ عِندَ ٱلۡمَشۡعَرِ ٱلۡحَرَامِۖ وَٱذۡكُرُوهُ كَمَا هَدَىٰكُمۡ وَإِن كُنتُم مِّن قَبۡلِهِۦ لَمِنَ ٱلضَّآلِّينَ ١٩٨
तथा तुमपर कोई दोष118 नहीं कि अपने पालनहार का अनुग्रह (फ़ज़्ल) तलाश करो। फिर जब तुम अरफ़ात119 से प्रस्थान करो, तो मश्अरे ह़राम (मुज़दलिफ़ा) के पास अल्लाह को याद करो और उसको उसी तरह याद करो, जैसे उसने तुम्हारा मार्गदर्शन किया है। और निःसंदेह इससे पहले तुम गुमराह लोगों में से थे।
फ़ुटनोट
118 अर्थात व्यापार करने में कोई दोष नहीं है।
119 अरफ़ात उस स्थान का नाम है जिस में ह़ाजी 9 ज़ुलह़िज्जा को विराम करते तथा सूर्यास्त के पश्चात् वहाँ से वापिस होते हैं।
तफ़सीर
ह़ज्ज के दौरान व्यापार और अन्य चीज़ों के माध्यम से ह़लाल जीविका की तलाश करने में तुमपर कोई पाप नहीं है। जब तुम ज़ुल-ह़िज्जा की नौ तारीख़ को अरफ़ा में ठहरने के बाद, दसवीं तारीख़ की रात को वहाँ से मुज़दलिफ़ा की ओर प्रस्थान करो; तो मुज़दलिफ़ा में मश्अरे ह़राम के पास तसबीह़ (सुब्ह़ानल्लाह), तहलील (ला इलाहा इल्लल्लाह) और दुआ करके अल्लाह को याद करो। तथा अल्लाह को इसलिए याद करो कि उसने अपने धर्म के स्थलों और अपने घर के ह़ज्ज के अनुष्ठानों के लिए तुम्हारा मार्गदर्शन किया, क्योंकि इससे पहले तुम उन लोगों में से थे जो उसकी शरीयत से अनजान थे।