۞ وَإِذِ ٱبۡتَلَىٰٓ إِبۡرَٰهِـۧمَ رَبُّهُۥ بِكَلِمَٰتٖ فَأَتَمَّهُنَّۖ قَالَ إِنِّي جَاعِلُكَ لِلنَّاسِ إِمَامٗاۖ قَالَ وَمِن ذُرِّيَّتِيۖ قَالَ لَا يَنَالُ عَهۡدِي ٱلظَّٰلِمِينَ ١٢٤
और (उस समय को याद करो) जब इबराहीम को उसके पालनहार ने कुछ बातों के साथ आज़माया, तो उसने उन्हें पूरा कर दिया। उसने कहा : निःसंदेह मैं तुम्हें लोगों का इमाम (पेशवा) बनाने वाला हूँ। (इबराहीम ने) कहा : तथा मेरी संतान में से भी? (अल्लाह ने) फरमाया : मेरा वचन अत्याचारियों62 को नहीं पहुँचता।
फ़ुटनोट
62 आयत में अत्याचार से अभिप्रेत केवल मानव पर अत्याचार नहीं, बल्कि सत्य को नकारना तथा शिर्क करना भी अत्याचार में शामिल है।
तफ़सीर
उस समय को याद करो, जब अल्लाह ने इबराहीम अलैहिस्सलाम को उन आदेशों और कर्तव्यों के द्वारा आज़माया, जिनका उन्हें आदेश दिया था, तो उन्होंने उनका निष्पादन किया और उन्हें पूर्णतम रूप से अंजाम दिया। अल्लाह ने अपने नबी इबराहीम अलैहिस्सलाम से कहा : मैं तुम्हें लोगों के लिए आदर्श बनाने वाला हूँ, ताकि तुम्हारे क्रियाकलापों और आचार-व्यवहार में तुम्हारा अनुकरण किया जाए। इबराहीम अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरी औलाद में से भी कुछ लोगों को इमाम बना, जिनका लोग अनुकरण करें। अल्लाह तआला ने उन्हें उत्तर देते हुए कहा : मेरा तुम्हारे लिए धर्म की पेशवाई का वचन, तुम्हारे वंश के अत्याचारियों को नहीं पहुँचता।