सूरह Al-Baqarah, आयत 123

2:123

وَٱتَّقُواْ يَوۡمٗا لَّا تَجۡزِي نَفۡسٌ عَن نَّفۡسٖ شَيۡـٔٗا وَلَا يُقۡبَلُ مِنۡهَا عَدۡلٞ وَلَا تَنفَعُهَا شَفَٰعَةٞ وَلَا هُمۡ يُنصَرُونَ ١٢٣

तथा उस दिन से डरो, जब कोई किसी के कुछ काम न आएगा, और न उससे कोई फ़िदया (दंड राशि) स्वीकार किया जाएगा और न उसे कोई अनुशंसा (सिफ़ारिश) लाभ देगी, और न उनकी मदद की जाएगी।

तफ़सीर

अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर अपने और क़ियामत के दिन की यातना के बीच, बचाव का साधन अपनाओ। क्योंकि उस दिन कोई भी किसी के कुछ काम न आएगा, और उस दिन उससे कोई छुड़ौती स्वीकार नहीं की जाएगी, चाहे वह कितनी भी बड़ी क्यों न हो, और न उस दिन उसे किसी की सिफ़ारिश लाभ देगी, चाहे उसका स्थान कितना भी ऊँचा क्यों न हो। और न ही अल्लाह के अलावा उसके लिए कोई मददगार होगा, जो उसकी मदद कर सके।