أَمِ ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةٗۖ قُلۡ هَاتُواْ بُرۡهَٰنَكُمۡۖ هَٰذَا ذِكۡرُ مَن مَّعِيَ وَذِكۡرُ مَن قَبۡلِيۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ ٱلۡحَقَّۖ فَهُم مُّعۡرِضُونَ ٢٤
क्या उन्होंने उसके सिवा और भी पूज्य बना लिए हैं? (ऐ नबी!) आप कह दें कि अपना प्रमाण लाओ। यह मेरे साथ वालों की किताब (क़ुरआन) है, और ये मुझसे पहले के लोगों पर उतरने वाली किताबें11 हैं, (इनमें तुम्हारे लिए कोई प्रमाण नहीं है)। बल्कि उनमें से अधिकतर लोग सत्य का ज्ञान नहीं रखते। इसी कारण, वे मुँह फेरने वाले हैं।
फ़ुटनोट
11 आयत का भावार्थ यह है कि यह क़ुरआन है और ये तौरात तथा इंजील हैं। इनमें कोई प्रमाण दिखा दो कि अल्लाह के अन्य साझी और पूज्य हैं। बल्कि ये मिश्रणवादी निर्मूल बातें कर रहे हैं।
तफ़सीर
बल्कि उन्होंने अल्लाह के अलावा कई पूज्य बना लिए हैं। (ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : तुम इनके पूजा के योग्य होने पर अपना प्रमाण प्रस्तुत करो। क्योंकि मुझपर उतरने वाली इस किताब (क़ुरआन) और पिछले रसूलों पर उतरने वाली किताबों में तुम्हारे लिए कोई प्रमाण नहीं है। बल्कि असल बात यह है कि अधिकांश मुश्रिक केवल अज्ञानता और बाप-दादों के अनुकरण पर भरोसा करते हैं। अतः वे सत्य को स्वीकार करने से मुँह फेरने वाले हैं।