وَلَقَدۡ كَتَبۡنَا فِي ٱلزَّبُورِ مِنۢ بَعۡدِ ٱلذِّكۡرِ أَنَّ ٱلۡأَرۡضَ يَرِثُهَا عِبَادِيَ ٱلصَّٰلِحُونَ ١٠٥
तथा निःसंदेह हमने 'लौहे महफ़ूज़' (में लिखने) के बाद अवतरित पुस्तकों45 में लिख दिया कि धरती के उत्तराधिकारी मेरे सदाचारी बंदे होंगे।
फ़ुटनोट
45 ''ज़बूर'' का अर्थ पुस्तक है, और यहाँ उससे अभिप्राय रसूलों पर अवतरित पिछली आकाशीय पुस्तकों हैं। कुछ भाष्यकारों के निकट ज़बूर से अभिप्राय वह पुस्तक है जो दाऊद अलैहिस्सलाम को प्रदान की गई।
तफ़सीर
हमने 'लौह़े मह़फ़ूज़' में लिखने के बाद, उन किताबों में लिख दिया, जिन्हें हमने अपने रसूलों पर उतारा कि धरती के उत्तराधिकारी अल्लाह के सदाचारी और उसका आज्ञापालन करने वाले बंदे ही होंगे। और वे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत के लोग हैं।