وَإِذَا رَأَيۡتَ ٱلَّذِينَ يَخُوضُونَ فِيٓ ءَايَٰتِنَا فَأَعۡرِضۡ عَنۡهُمۡ حَتَّىٰ يَخُوضُواْ فِي حَدِيثٍ غَيۡرِهِۦۚ وَإِمَّا يُنسِيَنَّكَ ٱلشَّيۡطَٰنُ فَلَا تَقۡعُدۡ بَعۡدَ ٱلذِّكۡرَىٰ مَعَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّٰلِمِينَ ٦٨
और जब आप उन लोगों को देखें, जो हमारी आयतों के विषय में (उपहास के साथ) बात करते हैं, तो उनसे मुँह फेर लें, यहाँ तक कि वे उसके अलावा बात में लग जाएँ, और यदि कभी शैतान आपको भुला दे, तो याद आ जाने के बाद ऐसे अत्याचारी लोगों के साथ न बैठें।
तफ़सीर
जब (ऐ रसूल!) आप मुश्रिकों को देखें कि वे हमारी आयतों के विषय में व्यंग्य और उपहास के साथ बात करते हैं, तो आप उनसे दूर रहें यहाँ तक कि वे हमारी आयतों के उपहास और व्यंग्य से मुक्त बातचीत में लग जाएँ। यदि शैतान आपको भुला दे और आप उनके साथ बैठ जाएँ, फिर आपको याद आ जाए, तो उनकी सभा को छोड़ दें और इन ज़्यादती करने वालों के साथ न बैठें।