وَمَا مِن دَآبَّةٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا طَٰٓئِرٖ يَطِيرُ بِجَنَاحَيۡهِ إِلَّآ أُمَمٌ أَمۡثَالُكُمۚ مَّا فَرَّطۡنَا فِي ٱلۡكِتَٰبِ مِن شَيۡءٖۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّهِمۡ يُحۡشَرُونَ ٣٨
तथा धरती में न कोई चलने वाला है तथा न कोई उड़ने वाला, जो अपने दो पंखों से उड़ता है, परंतु तुम्हारी जैसी जातियाँ हैं। हमने पुस्तक30 में किसी चीज़ की कमी31 नहीं छोड़ी। फिर वे अपने पालनहार की ओर एकत्र किए जाएँगे।32
फ़ुटनोट
30 पुस्तक का अर्थ "लौह़े मह़्फ़ूज़" है, जिसमें सारे संसार का भाग्य लिखा हुआ है।
31 इन आयतों का भावार्थ यह है कि यदि तुम निशानियों और चमत्कारों की माँग करते हो, तो यह पूरे संसार में जो जीव और पक्षी हैं, जिनके जीवन साधनों की व्यवस्था अल्लाह ने की है, और सबके भाग्य में जो लिख दिया है, वह पूरा हो रहा है। क्या तुम्हारे लिए अल्लाह के अस्तित्व और गुणों के प्रतीक नहीं हैं? यदि तुम ज्ञान तथा समझ से काम लो, तो यह संसार की व्यवस्था ही ऐसा लक्षण और प्रमाण है कि जिसके पश्चात किसी अन्य चमत्कार की आवश्यक्ता नहीं रह जाती।
32 अर्थ यह है कि सब जीवों के प्राण मरने के पश्चात् उसी के पास एकत्र हो जाते हैं, क्योंकि वही सब का उत्पत्तिकार है।
तफ़सीर
धरती के ऊपर चलने वाला न कोई जानवर है और न आकाश में उड़ने वाला कोई पक्षी है, परंतु सब सृष्टि और जीविका में (ऐ आदम की संतान!) तुम्हारी तरह जातियाँ हैं। हमने 'लौहे महफूज़' में कुछ भी नहीं छोड़ा परंतु उसे साबित (अंकित) कर दिया, और सबका ज्ञान अल्लाह के पास है। फिर क़ियामत के दिन वे अपने रब के पास ही फ़ैसले के लिए एकत्र किए जाएँगे, तो वह हर एक को वह प्रतिफल देगा जिसका वह हक़दार है।