أَن تَقُولُوٓاْ إِنَّمَآ أُنزِلَ ٱلۡكِتَٰبُ عَلَىٰ طَآئِفَتَيۡنِ مِن قَبۡلِنَا وَإِن كُنَّا عَن دِرَاسَتِهِمۡ لَغَٰفِلِينَ ١٥٦
ताकि (ऐ अरब वासियो!) तुम यह न कहो कि पुस्तक तो हमसे पहले के दो समुदायों (यहूदी तथा ईसाई) पर उतारी गई थी और निश्चय हम उनके पढ़ने-पढ़ाने से अनजान थे।
तफ़सीर
ऐसा न हो कि (ऐ अरब के बहुदेववादियो!) तुम कहो : अल्लाह ने तौरात और इंजील तो हमसे पहले यहूदियों और ईसाइयों पर उतारी थी, और उसने हमपर कोई किताब नहीं उतारी। तथा हम उनकी किताबें पढ़ना नहीं जानते। क्योंकि वे उनकी भाषा में हैं, हमारी भाषा में नहीं हैं।