وَقَالُواْ مَا فِي بُطُونِ هَٰذِهِ ٱلۡأَنۡعَٰمِ خَالِصَةٞ لِّذُكُورِنَا وَمُحَرَّمٌ عَلَىٰٓ أَزۡوَٰجِنَاۖ وَإِن يَكُن مَّيۡتَةٗ فَهُمۡ فِيهِ شُرَكَآءُۚ سَيَجۡزِيهِمۡ وَصۡفَهُمۡۚ إِنَّهُۥ حَكِيمٌ عَلِيمٞ ١٣٩
तथा उन्होंने कहा कि इन पशुओं के पेट में जो कुछ है, वह हमारे पुरुषों ही के लिए है और हमारी पत्नियों के लिए वर्जित है। और यदि मरा हुआ हो, तो सभी उसमें शामिल होंगे।88 शीघ्र ही अल्लाह उन्हें उनके ऐसा कहने का बदला देगा। निःसंदेह वह हिकमत वाला, सब कुछ जानने वाला है।
फ़ुटनोट
88 अर्थात वधित पशु के गर्भ से बच्चा निकल जाता और जीवित होता, तो उसे केवल पुरुष खा सकते थे और मुर्दा होता, तो सभी (स्त्री-पुरुष) खा सकते थे। (देखिए : सूरतुन्-नह़्ल : 16, 58-59, सूरतुल-अन्आम : 151, तथा सूरतुल-इसरा : 31)
तफ़सीर
उन्होंने यह भी कहा कि इन 'साइबा' एवं 'बहीरा' आदि जानवरों के पेट में जो बच्चे हैं, यदि वह जीवित पैदा हुआ है, तो वह हमारे पुरुषों के लिए अनुमेय और हमारी महिलाओं के लिए निषिद्ध है, और यदि उनके पेट में जो बच्चे हैं मृत पैदा हों, तो उसे पुरुष एवं महिला सब खा सकते हैं। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें उनके ऐसा कहने का वह बदला देगा जिसके वे योग्य हैं। वह अपने विधान तथा अपनी सृष्टि के मामलों के प्रबंधन में पूर्ण हिकमत वाला, उनके बारे में सब कुछ जानने वाला है।