وَكَذَٰلِكَ جَعَلۡنَا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوّٗا شَيَٰطِينَ ٱلۡإِنسِ وَٱلۡجِنِّ يُوحِي بَعۡضُهُمۡ إِلَىٰ بَعۡضٖ زُخۡرُفَ ٱلۡقَوۡلِ غُرُورٗاۚ وَلَوۡ شَآءَ رَبُّكَ مَا فَعَلُوهُۖ فَذَرۡهُمۡ وَمَا يَفۡتَرُونَ ١١٢
और (ऐ नबी!) इसी प्रकार, हमने हर नबी के लिए मनुष्यों एवं जिन्नों के शैतानों को शत्रु बना दिया, जो धोखा देने के लिए एक-दूसरे के मन में चिकनी-चुपड़ी बात डालते रहते हैं। और यदि आपका पालनहार चाहता, तो वे ऐसा न करते। तो आप उन्हें छोड़ दें और जो वे झूठ गढ़ते हैं।
तफ़सीर
जिस प्रकार हमने इन बहुदेववादियों की शत्रुता के साथ आपकी परीक्षा ली, उसी प्रकार हमने आपसे पहले के हर नबी की परीक्षा ली। चुनाँचे हमने उनमें से प्रत्येक नबी के लिए सरकश मनुष्यों में से कुछ दुश्मन एवं सरकश जिन्नों में से कुछ दुश्मन बना दिए, जो एक-दूसरे के दिल में बुरी बातें डालते हैं, चुनाँचे वे उन्हें धोखा देने के लिए उनके लिए झूठ को सुशोभित करके प्रस्तुत करते हैं। और यदि अल्लाह चाहता कि वे ऐसा न करें, तो वे ऐसा नहीं करते। लेकिन अल्लाह ने परीक्षण के तौर पर उनके लिए ऐसा चाहा था। अतः आप उन्हें और जो कुछ वे कुफ़्र और झूठ गढ़ते हैं, उसे छोड़ दें और उनकी परवाह न करें।