सूरह Al-An'am, आयत 109

6:109

وَأَقۡسَمُواْ بِٱللَّهِ جَهۡدَ أَيۡمَٰنِهِمۡ لَئِن جَآءَتۡهُمۡ ءَايَةٞ لَّيُؤۡمِنُنَّ بِهَاۚ قُلۡ إِنَّمَا ٱلۡأٓيَٰتُ عِندَ ٱللَّهِۖ وَمَا يُشۡعِرُكُمۡ أَنَّهَآ إِذَا جَآءَتۡ لَا يُؤۡمِنُونَ ١٠٩

और उन्होंने अपनी मज़बूत क़समें खाते हुए अल्लाह की क़सम खाई कि निःसंदेह यदि उनके पास कोई आयत (निशानी) आई, तो वे उसपर अवश्य ही ईमान लाएँगे। आप कह दें : आयतें (निशानियाँ) तो केवल अल्लाह के पास हैं और (ऐ ईमान वालो!) तुम्हें क्या पता कि निःसंदेह वे निशानियाँ जब आ जाएँगी, तो वे ईमान नहीं लाएँगे।69

फ़ुटनोट

69 मक्का के मुश्रिकों ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कहा कि यदि सफ़ा (पर्वत) सोने का हो जाए, तो वे ईमान ले आएँगे। कुछ मुसलमानों ने भी सोचा कि यदि ऐसा हो जाए, तो संभव है कि वे ईमान ले आएँ। इसी पर यह आयत उतरी। (इब्ने कसीर)

तफ़सीर

बहुदेववादियों ने अपनी सबसे मज़बूत शपथ लेते हुए अल्लाह की क़सम खाई : निःसंदेह यदि मुहम्मद उनके पास उन निशानियों में से कोई निशानी लेकर आए, जिनका उन्होंने सुझाव दिया है, तो वे अवश्य ही उसपर ईमान ले आएँगे। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : निशानियाँ मेरे पास नहीं हैं कि मैं उन्हें उतार दूँ। बल्कि वे अल्लाह के पास हैं, वह जब चाहे उन्हें उतारता है। और (ऐ मोमिनो!) तुम्हें क्या मालूम कि जब ये निशानियाँ उनके प्रस्ताव के अनुसार आ जाएँ, वे उनपर ईमान नहीं लाएँगे? बल्कि वे अपने हठ और इनकार पर बने रहेंगे; क्योंकि वे मार्गदर्शन नहीं चाहते हैं।