सूरह Al-Ahzab, आयत 38

33:38

مَّا كَانَ عَلَى ٱلنَّبِيِّ مِنۡ حَرَجٖ فِيمَا فَرَضَ ٱللَّهُ لَهُۥۖ سُنَّةَ ٱللَّهِ فِي ٱلَّذِينَ خَلَوۡاْ مِن قَبۡلُۚ وَكَانَ أَمۡرُ ٱللَّهِ قَدَرٗا مَّقۡدُورًا ٣٨

नबी पर उस कार्य में कोई तंगी (पाप) नहीं है, जो अल्लाह ने उसके लिए निर्धारित किया है।26 अल्लाह का यही नियम रहा है उन लोगों के बारे में भी जो पहले गुज़र चुके हैं। तथा अल्लाह का आदेश एक निश्चित निर्णय होता है।

फ़ुटनोट

26 अर्थात अपने मुँह बोले पुत्र की पत्नी से उसके तलाक़ देने के पश्चात् विवाह करने में।

तफ़सीर

नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उस चीज़ में कोई गुनाह या तंगी नहीं है, जो अल्लाह ने उनके लिए अपने दत्तक पुत्र की पत्नी से विवाह करना वैध कर दिया है। वह इस विषय में अपने पूर्व नबियों की सुन्नत (तरीक़े) का पालन कर रहे हैं। इसलिए वह इस मामले में कोई अनोखे रसूल नहीं हैं। तथा अल्लाह जो निर्णय कर देता है (जैसे कि इस शादी के पूरा होने और गोद लेने की प्रथा को अमान्य घोषित करने और इसमें नबी की कोई राय या पसंद न होने का) वह पूरा होकर रहता है, उसे कोई टाल नहीं सकता।