सूरह Al-Ahzab, आयत 17

33:17

قُلۡ مَن ذَا ٱلَّذِي يَعۡصِمُكُم مِّنَ ٱللَّهِ إِنۡ أَرَادَ بِكُمۡ سُوٓءًا أَوۡ أَرَادَ بِكُمۡ رَحۡمَةٗۚ وَلَا يَجِدُونَ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ وَلِيّٗا وَلَا نَصِيرٗا ١٧

आप कह दीजिए : वह कौन है, जो तुम्हें अल्लाह से बचाएगा, यदि वह तुम्हारे साथ कोई बुराई चाहे अथवा तुम पर कोई दया करना चाहे? और वे अपने लिए अल्लाह के सिवा न कोई संरक्षक पाएँगे और न कोई सहायक।

तफ़सीर

(ऐ रसूल) आप उनसे कह दें : अगर अल्लाह तुम्हारे साथ उसी मौत और क़त्ल का इरादा करे, जिस तुम नापसंद करते हो, या तुम्हारे साथ सलामती और भलाई का इरादा करे, जिसकी तुम आशा करते हो, तो वह कौन है जो तुम्हें अल्लाह से बचा सकता है?! कोई भी तुम्हें इससे बचा नहीं सकता। और ये मुनाफ़िक़ लोग अपने लिए अल्लाह के सिवा कोई संरक्षक नहीं पाएँगे, जो उनके मामले की देखभाल करे और न ही कोई सहायक पाएँगे, जो उन्हें अल्लाह की सज़ा से बचा सके।