सूरह Al-Ahqaf, आयत 31

46:31

يَٰقَوۡمَنَآ أَجِيبُواْ دَاعِيَ ٱللَّهِ وَءَامِنُواْ بِهِۦ يَغۡفِرۡ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمۡ وَيُجِرۡكُم مِّنۡ عَذَابٍ أَلِيمٖ ٣١

ऐ हमारी जाति के लोगो! अल्लाह की ओर बुलाने वाले का निमंत्रण स्वीकार करो और उसपर ईमान ले आओ, वह तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा और तुम्हें दर्दनाक यातना से पनाह देगा।

तफ़सीर

ऐ मेरी जाति के लोगो! मुहम्मद ने तुम्हें जिस सत्य की ओर बुलाया है, उसे स्वीकार कर लो और इस बात पर ईमान ले आओ कि वह अपने पालनहार की ओर से एक रसूल हैं, अल्लाह तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा और तुम्हें उस दर्दनाक यातना से बचा लेगा, जो तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है, यदि तुमने उस सत्य को स्वीकार न किया जिसकी ओर उन्होंने तुम्हें बुलाया है और इस बात पर ईमान न लाए कि वह अपने पालनहार की ओर से रसूल बनाकर भेजे गए हैं।