مَا خَلَقۡنَا ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَآ إِلَّا بِٱلۡحَقِّ وَأَجَلٖ مُّسَمّٗىۚ وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ عَمَّآ أُنذِرُواْ مُعۡرِضُونَ ٣
हमने आकाशों तथा धरती को और जो कुछ उन दोनों के दरमियान है सत्य के साथ और एक नियत अवधि के लिए पैदा किया है। तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया उस चीज़ से जिससे उन्हें सावधान किया गया, मुँह फेरने वाले हैं।
तफ़सीर
हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उन दोनों के बीच है, व्यर्थ नहीं बनाया, बल्कि हमने उन सभी को सत्य के साथ व्यापक हिकमतों के तहत बनाया है। उन हिकमतों में से यह है कि बंदे उनके माध्यम से अपने रब को पहचानें, ताकि वे केवल उसी की इबादत करें, और उसके साथ किसी चीज़ को साझी न बनाएँ, और यह कि वे धरती पर अपने उत्तराधिकार की अपेक्षाओं को एक विशिष्ट अवधि के लिए पूरा करें जिसे केवल अल्लाह ही जानता है। लेकिन जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया, वे उस चीज़ से मुँह फेरने वाले हैं, जिससे उन्हें अल्लाह की किताब में डराया गया है। वे उसकी परवाह नहीं करते।