قُلۡ أَرَءَيۡتُم مَّا تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَرُونِي مَاذَا خَلَقُواْ مِنَ ٱلۡأَرۡضِ أَمۡ لَهُمۡ شِرۡكٞ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِۖ ٱئۡتُونِي بِكِتَٰبٖ مِّن قَبۡلِ هَٰذَآ أَوۡ أَثَٰرَةٖ مِّنۡ عِلۡمٍ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ٤
(ऐ रसूल!) आप कह दें : क्या तुमने उन चीज़ों को देखा जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, मुझे दिखाओ कि उन्होंने धरती की कौन-सी चीज़ पैदा की है, या आसमानों में उनका कोई हिस्सा है? मेरे पास इससे पहले की कोई किताब1, या ज्ञान की कोई अवशेष बात2 ले आओ, यदि तुम सच्चे हो।
फ़ुटनोट
1 अर्थात यदि तुम्हें मेरी शिक्षा का सत्य होना स्वीकार नहीं, तो किसी धर्म की आकाशीय पुस्तक ही से सिद्ध करके दिखा दो कि सत्य की शिक्षा कुछ और है। और यह भी न हो सके, तो किसी ज्ञान पर आधारित कथन और रिवायत ही से सिद्ध कर दो कि यह शिक्षा पूर्व के नबियों ने नहीं दी है। अर्थ यह है कि जब आकाशों और धरती की रचना अल्लाह ही ने की है तो उसके साथ दूसरों को पूज्य क्यों बनाते हो?
2 अर्थात इससे पहले वाली आकाशीय पुस्तकों का।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) आप सत्य से मुँह फेरने वाले इन मुश्रिकों से कह दें : मुझे अपने उन बुतों के बारे में बताओ, जिनकी तुम अल्लाह के अलावा पूजा करते हो कि उन्होंने धरती के हिस्सों में से क्या बनाया है? क्या उन्होंने कोई पहाड़ बनाया? क्या उन्होंने कोई नहर बनाई? या क्या आकाशों को बनाने में अल्लाह के साथ उनका कोई हिस्सा है? यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि तुम्हारी मूर्तियाँ पूजा के योग्य हैं, तो मेरे पास क़ुरआन से पहले अल्लाह की उतारी हुई कोई किताब या पूर्वजों के छोड़े हुए ज्ञान का अवशेष ले आओ।