सूरह Yusuf, आयत 85

12:85

قَالُواْ تَٱللَّهِ تَفۡتَؤُاْ تَذۡكُرُ يُوسُفَ حَتَّىٰ تَكُونَ حَرَضًا أَوۡ تَكُونَ مِنَ ٱلۡهَٰلِكِينَ ٨٥

उन्होंने कहा : अल्लाह की क़सम! आप बराबर यूसुफ़ को याद करते रहेंगे, यहाँ तक कि (शोक से) घुल जाएँ या अपना विनाश कर लें।

तफ़सीर

यूसुफ़ के भाइयों ने अपने पिता से कहा : अल्लाह की क़सम! (ऐ हमारे पिता!) आप हमेशा यूसुफ़ को याद करते रहेंगे और उसके लिए शोक मनाते रहेंगे, यहाँ तक कि आप सख़्त बीमार हो जाएँ, या प्राण ही त्याग दें।