ثُمَّ بَدَا لَهُم مِّنۢ بَعۡدِ مَا رَأَوُاْ ٱلۡأٓيَٰتِ لَيَسۡجُنُنَّهُۥ حَتَّىٰ حِينٖ ٣٥
फिर उन लोगों9 ने निशानियाँ10 देख लेने के बाद यही उचित समझा कि उस (यूसुफ़) को एक अवधि तक के लिए जेल में रखें।
फ़ुटनोट
9 अर्थात अज़ीज़ (मिस्र देश का शासक) और उसके साथियों ने।
10 अर्थात् यूसुफ़ के निर्दोष होने की निशानियाँ।
तफ़सीर
फिर जब अज़ीज़ और उसके समुदाय के लोगों ने उनकी बेगुनाही का सबूत देखा, तो उनकी यह राय बनी कि उन्हें एक अज्ञात अवधि के लिए जेल में डाल दें। (ताकि वह मामला खुल न जाए)।