فَإِن كُنتَ فِي شَكّٖ مِّمَّآ أَنزَلۡنَآ إِلَيۡكَ فَسۡـَٔلِ ٱلَّذِينَ يَقۡرَءُونَ ٱلۡكِتَٰبَ مِن قَبۡلِكَۚ لَقَدۡ جَآءَكَ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡمُمۡتَرِينَ ٩٤
फिर यदि आपको उसमें कुछ संदेह25 हो, जो हमने आपकी ओर उतारा है, तो उन लोगों से पूछ लें, जो आपसे पहले किताब पढ़ते हैं। निःसंदेह आपके पास आपके पालनहार की ओर से सत्य आ चुका है। अतः आप हरगिज़ संदेह करने वालों में से न हों।
फ़ुटनोट
25 आयत में संबोधित नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को किया गया है। परंतु वास्तव में उनको संबोधित किया गया है जिनको कुछ संदेह था। यह अरबी की एक भाषा शैली है।
तफ़सीर
यदि (ऐ रसूल!) आप उस क़ुरआन की सच्चाई के बारे में, जो हमने आपकी ओर उतारा है, संदेह और अचरज में हैं, तो ईमान लाने वाले उन यहूदियों से पूछ लें जो तौरात पढ़ते हैं और उन ईसाइयों से पूछ लें जो इंजील पढ़ते हैं। वे आपको बताएँगे कि आपपर जो उतारा गया है, वह सत्य है; क्योंकि वे अपनी पुस्तकों में उसका विवरण पाते हैं। निःसंदेह आपके पास आपके पालनहार की ओर से वह सत्य आया है, जिसमें कोई संदेह नहीं है। अतः आप कदापि संदेह करने वालों में से न हों।