هُوَ ٱلَّذِي يُسَيِّرُكُمۡ فِي ٱلۡبَرِّ وَٱلۡبَحۡرِۖ حَتَّىٰٓ إِذَا كُنتُمۡ فِي ٱلۡفُلۡكِ وَجَرَيۡنَ بِهِم بِرِيحٖ طَيِّبَةٖ وَفَرِحُواْ بِهَا جَآءَتۡهَا رِيحٌ عَاصِفٞ وَجَآءَهُمُ ٱلۡمَوۡجُ مِن كُلِّ مَكَانٖ وَظَنُّوٓاْ أَنَّهُمۡ أُحِيطَ بِهِمۡ دَعَوُاْ ٱللَّهَ مُخۡلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَ لَئِنۡ أَنجَيۡتَنَا مِنۡ هَٰذِهِۦ لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلشَّٰكِرِينَ ٢٢
वही है जो तुम्हें जल और थल में चलाता है, यहाँ तक कि जब तुम नावों में होते हो और वे उन्हें लेकर अच्छी (अनुकूल) हवा के सहारे चल पड़ती हैं और वे उससे प्रसन्न हो उठते हैं, कि अचानक एक तेज़ हवा उन (नावों) पर आती है और उनपर प्रत्येक स्थान से लहरें आ जाती हैं और वे समझते हैं कि निःसंदेह उन्हें घेर लिया गया है, तो वे अल्लाह को इस तरह पुकारते हैं कि उसके लिए हर इबादत को विशुद्ध करने वाले9 होते हैं, निश्चय अगर तूने हमें उससे नजात दे दी, तो हम अवश्य ही शुक्रगुज़ारों में से होंगे।
फ़ुटनोट
9 और सब देवी-देवताओं को भूल जाते हैं।
तफ़सीर
वह अल्लाह ही है, जो (ऐ लोगो!) तुम्हें थल में तुम्हारे पैरों पर तथा तुम्हारे चौपायों (सवारियों) पर चलाता है और वही तुम्हें समुद्र में नौकाओं में चलाता है। यहाँ तक कि जब तुम नौकाओं में समुद्र में होते हो और नौकाएँ यात्रियों को लेकर अच्छी हवा के सहारे चल पड़ती हैं, तो सवार लोग उस अच्छी हवा से प्रसन्न हो उठते हैं। चुनाँचे इसी दौरान जबकि वे अपने आनंद में होते हैं, उनपर एक तेज़ चलने वाली हवा आती है और हर तरफ़ से समुद्र की लहरें उनपर उठती चली आती हैं तथा उनका प्रबल गुमान यह होता है कि उनका सर्वनाश होने वाला है। ऐसे में, वे अकेले अल्लाह को पुकारते हैं और उसके साथ किसी दूसरे को साझी नहीं करते, यह कहते हुए : यदि तूने हमें इस विनाशकारी विपत्ति से बचा लिया, तो तेरे इस अनुग्रह के लिए हम अवश्य तेरे आभारी होंगे।