۞ مَثَلُ ٱلۡفَرِيقَيۡنِ كَٱلۡأَعۡمَىٰ وَٱلۡأَصَمِّ وَٱلۡبَصِيرِ وَٱلسَّمِيعِۚ هَلۡ يَسۡتَوِيَانِ مَثَلًاۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ٢٤
दोनों पक्षों का उदाहरण अंधे और बहरे तथा देखने और सुनने वाले की तरह है। क्या ये दोनों उदाहरण में बराबर हो सकते हैं? क्या तुम (इससे) नसीहत नहीं पकड़ते?7
फ़ुटनोट
7 कि दोनों का परिणाम एक नहीं हो सकता। एक को नरक में और दूसरे को स्वर्ग में जाना है। ( देखिए : सूरतुल-ह़श्र, आयत : 20)
तफ़सीर
काफिरों और मोमिनों के पक्षों का उदाहरण अंधे की तरह है, जो देख नहीं सकता, और बहरे की तरह है, जो सुन नहीं सकता। यह उदाहरण काफिरों के पक्ष का है, जो सत्य को स्वीकार करने के इरादे से नहीं सुनता और न ही उसे ऐसी दृष्टि से देखता है जो उन्हें लाभान्वित करे। तथा दूसरे पक्ष का उदाहरण सुनने और देखने वाले की तरह है। यह मोमिनों के पक्ष का उदाहरण है, जो सुनता और देखता है। क्या ये दोनों पक्ष अपनी स्थिति और विशेषता में समान हो सकते हैं?! वे दोनों कभी समान नहीं हो सकते। क्या तुम इन दोनों की असमानता से कोई सीख नहीं लेते?!