وَلَئِنۡ أَذَقۡنَٰهُ نَعۡمَآءَ بَعۡدَ ضَرَّآءَ مَسَّتۡهُ لَيَقُولَنَّ ذَهَبَ ٱلسَّيِّـَٔاتُ عَنِّيٓۚ إِنَّهُۥ لَفَرِحٞ فَخُورٌ ١٠
और यदि हम उसे विपत्ति पहुँचने के बाद कोई नेमत चखाएँ, तो निश्चय ही वह अवश्य कहेगा : समस्त विपत्तियाँ मुझसे दूर हो गईं। निःसंदेह वह बहुत इतराने वाला, बहुत गर्व करने वाला है।3
फ़ुटनोट
3 इसमें मनुष्य की स्वभाविक दशा की ओर संकेत है।
तफ़सीर
और यदि हम उसे गरीबी और बीमारी के पश्चात आजीविका में विस्तार और स्वास्थ्य का मज़ा चखा दें, तो वह अवश्य कहेगा : विपत्ति मुझसे दूर हो गई और तकलीफ़ ख़त्म हो गई। वह इस पर अल्लाह का शुक्रिया अदा नहीं करता। वह ख़ुशी से इतराता फिरता है और अल्लाह की प्रदान की हुई नेमतों पर लोगों के सामने शेखी बघारता और गर्व करता है।