सूरह Fussilat, आयत 22

41:22

وَمَا كُنتُمۡ تَسۡتَتِرُونَ أَن يَشۡهَدَ عَلَيۡكُمۡ سَمۡعُكُمۡ وَلَآ أَبۡصَٰرُكُمۡ وَلَا جُلُودُكُمۡ وَلَٰكِن ظَنَنتُمۡ أَنَّ ٱللَّهَ لَا يَعۡلَمُ كَثِيرٗا مِّمَّا تَعۡمَلُونَ ٢٢

तथा तुम (पाप करते समय) छिपते7 भी नहीं थे कि कहीं तुम्हारे कान, तुम्हारी आँखें और तुम्हारी खालें तुम्हारे विरुद्ध गवाही न दे दें। बल्कि, तुम यह समझते रहे कि अल्लाह उनमें से अधिकतर बातों को जानता ही नहीं, जो तुम करते हो।

फ़ुटनोट

7 आदरणीय अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि ख़ाना काबा के पास एक घर में दो क़ुरैशी तथा एक सक़फ़ी अथवा दो सक़फ़ी और एक क़ुरैशी थे। तो एक ने दूसरे से कहा कि तुम समझते हो कि अल्लाह हमारी बातें सुन रहा है? किसी ने कहा : यदि कुछ सुनता है तो सब कुछ सुनता है। उसी पर यह आयत उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4816, 4817, 7521)

तफ़सीर

और तुम पाप करते समय अपने पापों को छिपाते भी नहीं थे कि कहीं तुम्हारे कान, तुम्हारी आँखें तथा तुम्हारी खालें तुम्हारे विरुद्ध गवाही न दे दें, क्योंकि तुम हिसाब, यातना तथा मौत के पश्चात बदले का यक़ीन ही नहीं रखते थे। तुम समझते रहे कि अल्लाह तुम्हारे अधिकतर कर्मों को जानता ही नहीं है, बल्कि वह उनसे अनभिज्ञ रहता है। यही कारण है कि तुम धोखे में पड़ गए।