فَقَضَىٰهُنَّ سَبۡعَ سَمَٰوَاتٖ فِي يَوۡمَيۡنِ وَأَوۡحَىٰ فِي كُلِّ سَمَآءٍ أَمۡرَهَاۚ وَزَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنۡيَا بِمَصَٰبِيحَ وَحِفۡظٗاۚ ذَٰلِكَ تَقۡدِيرُ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡعَلِيمِ ١٢
फिर उसने उन्हें दो दिनों में सात आकाश बना दिए और प्रत्येक आकाश में उससे संबंधित काम की वह़्य की। तथा हमने निकटतम (निचले) आकाश को दीपों (चमकदार सितारों) से सुशोभित किया, तथा (उनके द्वारा) उसको सुरक्षित कर दिया।4 यह अत्यंत प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाले (अल्लाह) की योजना है।
फ़ुटनोट
4 अर्थात शैतानों से सुरक्षित कर दिया। (देखिए : सूरतुस-साफ़्फ़ात, आयत 7 से 10 तक)।
तफ़सीर
अल्लाह ने आकाशों को दो दिनों में बनाकर पूरा किया। अर्थात् बृहस्पतिवार एवं शुक्रवार को। इस तरह, आकाशों एवं धरती की सृष्टि कुल छः दिनों में संपन्न हुई। और अल्लाह ने प्रत्येक आकाश में उससे संबंधित अपने निर्णयों और आदेशों की वह्य कर दी। और हमने निचले आकाश को सितारों से सजाया तथा उनके ज़रिए उसे सुरक्षा प्रदान की, ताकि शैतान छिपकर कुछ सुन न सके। यह सारी योजना उस अति प्रभुत्वशाली अल्लाह की है, जिसे कोई हरा नहीं सकता, वह अपनी मखलूक़ को भली-भाँति जानता है।