۞ وَإِذَا مَسَّ ٱلۡإِنسَٰنَ ضُرّٞ دَعَا رَبَّهُۥ مُنِيبًا إِلَيۡهِ ثُمَّ إِذَا خَوَّلَهُۥ نِعۡمَةٗ مِّنۡهُ نَسِيَ مَا كَانَ يَدۡعُوٓاْ إِلَيۡهِ مِن قَبۡلُ وَجَعَلَ لِلَّهِ أَندَادٗا لِّيُضِلَّ عَن سَبِيلِهِۦۚ قُلۡ تَمَتَّعۡ بِكُفۡرِكَ قَلِيلًا إِنَّكَ مِنۡ أَصۡحَٰبِ ٱلنَّارِ ٨
तथा जब मनुष्य को कोई कष्ट पहुँचता है, तो वह अपने पालनहार को पुकारता है, इस हाल में कि उसी की ओर एकाग्र, ध्यानमग्न होता है। फिर जब वह उसे अपनी ओर से कोई सुख प्रदान करता है, तो वह उसे भूल जाता है, जिसे वह इससे पहले पुकार रहा था, तथा वह अल्लाह का साझी बना लेता है, ताकि उसके मार्ग से गुमराह कर दे। आप कह दें कि अपने कुफ़्र का थोड़ा सा लाभ उठा लो। निश्चय तुम जहन्नमियों में से हो।
तफ़सीर
जब काफ़िर व्यक्ति को कोई बीमारी, धन की हानि और डूबने के डर जैसी कोई तकलीफ़ पहुँचती है, तो वह अपने पालनहार को पुकारता है कि उसे पहुँचने वाली तकलीफ़ को उससे दूर कर दे, इस हाल में कि वह केवल उसी की ओर लौटने वाला होता है। फिर जब अल्लाह उसे कोई नेमत प्रदान करता है, जैसे कि उसे पहुँचने वाली तकलीफ़ को उससे दूर कर देता है, तो वह पहले जिसके आगे गिड़गिड़ाता था, उसे छोड़ देता है, और वह अल्लाह है। तथा वह अल्लाह के साझी बनाकर, अल्लाह के सिवा उनकी पूजा करने लगता है। ताकि वह अन्य लोगों को उस रास्ते से भटका दे, जो अल्लाह की ओर पहुँचाने वाला है। (ऐ रसूल!) आप इस दशा वाले व्यक्ति से कह दें : अपने जीवन के बाक़ी हिस्सों के लिए अपने कुफ़्र का आनंद ले लो, जो कि बहुत थोड़ा समय है। क्योंकि तुम क़ियामत के दिन जहन्नम में जाने वालों में से हो, जो उसमें उस तरह रहने वाले हैं, जिस तरह एक साथी अपने साथी के साथ रहता है।