إِن تَكۡفُرُواْ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَنِيٌّ عَنكُمۡۖ وَلَا يَرۡضَىٰ لِعِبَادِهِ ٱلۡكُفۡرَۖ وَإِن تَشۡكُرُواْ يَرۡضَهُ لَكُمۡۗ وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٞ وِزۡرَ أُخۡرَىٰۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُم مَّرۡجِعُكُمۡ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَۚ إِنَّهُۥ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ ٧
यदि तुम नाशुक्री करो, तो अल्लाह तुमसे बहुत बेनियाज़ है और वह अपने बंदों के लिए नाशुक्री पसंद नहीं करता, और यदि तुम शुक्रिया अदा करो, तो वह उसे तुम्हारे लिए पसंद करेगा। और कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा। फिर तुम्हारा लौटना तुम्हारे पालनहार ही की ओर है। तो वह तुम्हें बतलाएगा जो कुछ तुम किया करते थे। निश्चय वह दिलों के भेदों को भली-भाँति जानने वाला है।
तफ़सीर
(ऐ लोगो!) अगर तुम अपने रब की नाशुक्री (या कुफ़्र) करोगे, तो अल्लाह तुम्हारे ईमान से बेपरवाह है। तुम्हारे कुफ़्र से उसका कोई नुक़सान नहीं होने वाला। तुम्हारे कुफ़्र का नुक़सान तुम्हारी ही ओर लौटेगा। अल्लाह इस बात को पसंद नहीं करता कि उसके बंदे उसकी नाशुक्री करें, और वह उन्हें नाशुक्री का आदेश नहीं देता। क्योंकि अल्लाह अनैतिकता और बुरे काम का आदेश नहीं देता। और अगर तुम अल्लाह का उसकी नेमतों पर शुक्रिया अदा करो और उसपर ईमान ले आओ, तो वह तुम्हारे शुक्र को पसंद करेगा और तुम्हें उसका बदला देगा। तथा कोई प्राणी किसी दूसरे प्राणी के गुनाह का बोझ नहीं उठाएगा। बल्कि हर प्राणी की उसके किए हुए कर्मों पर पकड़ होगी। फिर क़ियामत के दिन तुम्हारी वापसी अकेले तुम्हारे पालनहार ही की ओर होगी, और वह तुम्हें बताएगा कि तुम दुनिया में क्या करते थे, और तुम्हें तुम्हारे कर्मों का प्रतिफल देगा। वह पवित्र अल्लाह अपने बंदों के दिलों की बातों को ख़ूब जानने वाला है। उनके दिलों की कोई बात उससे छिपी नहीं है।