وَمَا قَدَرُواْ ٱللَّهَ حَقَّ قَدۡرِهِۦ وَٱلۡأَرۡضُ جَمِيعٗا قَبۡضَتُهُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَٱلسَّمَٰوَٰتُ مَطۡوِيَّٰتُۢ بِيَمِينِهِۦۚ سُبۡحَٰنَهُۥ وَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشۡرِكُونَ ٦٧
तथा उन्होंने अल्लाह का सम्मान नहीं किया, जैसे उसका सम्मान करना चाहिए था और क़ियामत के दिन पूरी धरती उसकी एक मुट्ठी में होगी, तथा आकाश उसके दाएँ हाथ14 में लिपटे होंगे। वह उस शिर्क से पवित्र तथा उच्च है, जो वे कर रहे हैं।
फ़ुटनोट
14 ह़दीस में आता है कि एक यहूदी विद्वान नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया और कहा : हम अल्लाह के विषय में (अपनी धर्म पुस्तकों में) यह पाते हैं कि प्रलय के दिन आकाशों को एक उँगली, तथा भूमि को एक उँगली पर और पेड़ों को एक उंँगली, जल तथा तरी को एक उंँगली पर और समस्त उत्पत्ति को एक उंँगली पर रख लेगा, तथा कहेगा : "मैं ही राजा हूँ।" यह सुनकर आप हँस पड़े और इसी आयत को पढ़ा। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस : 4812, 6519, 7382, 7413)
तफ़सीर
तथा बहुदेववादियों ने अल्लाह का सम्मान नहीं किया, जैसा सम्मान करना चाहिए था, जब उन्होंने अल्लाह की कमज़ोर एवं विवश मख़लूक़ को उसका साझी बनाया और उसकी क्षमता की अनदेखी की, जबकि उसकी क्षमता का एक प्रमाण यह है कि क़ियामत के दिन धरती अपने पर्वतों, पेड़ों तथा नहरों एवं समुद्रों समेत उसकी एक मुट्ठी में होगी, तथा सातों आकाश उसके दाहिने हाथ में लिपटे होंगे। इस शान का मालिक अल्लाह पवित्र तथा उच्च है उस शिर्क से, जो वे कर रहे हैं।