وَلَا عَلَى ٱلَّذِينَ إِذَا مَآ أَتَوۡكَ لِتَحۡمِلَهُمۡ قُلۡتَ لَآ أَجِدُ مَآ أَحۡمِلُكُمۡ عَلَيۡهِ تَوَلَّواْ وَّأَعۡيُنُهُمۡ تَفِيضُ مِنَ ٱلدَّمۡعِ حَزَنًا أَلَّا يَجِدُواْ مَا يُنفِقُونَ ٩٢
और न उन लोगों पर (कोई पाप है) कि जब वे आपके पास आए, ताकि आप उनके लिए सवारी की व्यवस्था कर दें, आपने कहा मैं वह चीज़ नहीं पाता जिसपर तुम्हें सवार करूँ, तो वे इस हाल में वापस हुए कि उनकी आँखें आँसुओं से बह रही थीं42 इस शोक के कारण कि वे खर्च करने के लिए कुछ नहीं पाते।
फ़ुटनोट
42 ये विभिन्न क़बीलों के लोग थे, जो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सेवा में उपस्थित हुए कि आप हमारे लिए सवारी का प्रबंध कर दें। हम भी आपके साथ तबूक के जिहाद में जाएँगे। परंतु आप सवारी का कोई प्रबंध न कर सके और वे रोते हुए वापस हुए। (इब्ने कसीर)
तफ़सीर
इसी तरह आपसे पीछे रहने वाले उन लोगों पर भी कोई पाप नहीं है, कि जब वे (ऐ रसूल!) आपके पास यह अनुरोध लेकर आए कि आप उनके लिए सवारी का प्रबंध कर दें, और आपने उनसे कहा कि मैं तुम्हारे लिए सवारी की व्यवस्था करने के लिए कुछ नहीं पाता; तो वे आपके पास से इस दशा में वापस हुए कि उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे, उन्हें इस बात का अफसोस था कि उन्हें खुद अपने पास से या आपके पास से वह नहीं मिला जो वे खर्च करें।