قُلۡ إِن كَانَ ءَابَآؤُكُمۡ وَأَبۡنَآؤُكُمۡ وَإِخۡوَٰنُكُمۡ وَأَزۡوَٰجُكُمۡ وَعَشِيرَتُكُمۡ وَأَمۡوَٰلٌ ٱقۡتَرَفۡتُمُوهَا وَتِجَٰرَةٞ تَخۡشَوۡنَ كَسَادَهَا وَمَسَٰكِنُ تَرۡضَوۡنَهَآ أَحَبَّ إِلَيۡكُم مِّنَ ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَجِهَادٖ فِي سَبِيلِهِۦ فَتَرَبَّصُواْ حَتَّىٰ يَأۡتِيَ ٱللَّهُ بِأَمۡرِهِۦۗ وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡفَٰسِقِينَ ٢٤
(ऐ नबी!) कह दो कि यदि तुम्हारे बाप और तुम्हारे बेटे और तुम्हारे भाई और तुम्हारी पत्नियाँ और तुम्हारे परिवार और (वे) धन जो तुमने कमाए हैं और (वह) व्यापार जिसके मंदा होने से तुम डरते हो तथा रहने के घर जिन्हें तुम पसंद करते हो, तुम्हें अल्लाह तथा उसके रसूल और अल्लाह की राह में जिहाद करने से अधिक प्रिय हैं, तो प्रतीक्षा करो, यहाँ तक कि अल्लाह अपना हुक्म ले आए और अल्लाह अवज्ञाकारियों को मार्ग नहीं दिखाता।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : यदि (ऐ मोमिनो!) तुम्हारे बाप, तुम्हारे बेटे, तुम्हारे भाई, तुम्हारी पत्नियाँ, तुम्हारे रिश्तेदार, तुम्हारा धन जो तुमने कमाया है और तुम्हारा व्यापार जिसके प्रचलन को तुम पसंद करते हो और उसकी मंदी से डरते हो, तथा तुम्हारे घर जिनमें रहने का मोह रखते हो - यदि ये सब तुम्हें अल्लाह और उसके रसूल से, तथा उसकी राह में जिहाद करने से अधिक प्रिय हैं, तो अल्लाह की ओर से आने वाली यातना की प्रतीक्षा करो। और अल्लाह अपनी आज्ञाकारिता से निकल जाने वालों को उस काम को करने का सामर्थ्य नहीं देता, जिससे वह प्रसन्न होता है।