إِنَّمَا يَعۡمُرُ مَسَٰجِدَ ٱللَّهِ مَنۡ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَأَقَامَ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَى ٱلزَّكَوٰةَ وَلَمۡ يَخۡشَ إِلَّا ٱللَّهَۖ فَعَسَىٰٓ أُوْلَٰٓئِكَ أَن يَكُونُواْ مِنَ ٱلۡمُهۡتَدِينَ ١٨
अल्लाह की मस्जिदें तो वही आबाद करता है, जो अल्लाह पर और अंतिम दिन (क़ियामत) पर ईमान लाया, तथा उसने नमाज़ क़ायम की और ज़कात दी और अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरा। तो ये लोग आशा है कि मार्ग दर्शन पाने वालों में से होंगे।
तफ़सीर
मस्जिदों को आबाद करने के योग्य और उसके हक़ को पूरा करने वाला केवल वही व्यक्ति है, जो अकेले अल्लाह पर ईमान रखता है और उसके साथ किसी को साझी नहीं बनाता है, तथा क़ियामत के दिन पर ईमान रखता, नमाज़ क़ायम करता, अपने धन की ज़कात देता और पवित्र अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरता है। तो यही वे लोग हैं, जिनके बारे में उम्मीद की जाती है कि वे सीधे रास्ते पर चलेंगे, और जहाँ तक बहुदेववादियों का सवाल है, तो वे इससे बहुत दूर हैं।