وَٱلسَّٰبِقُونَ ٱلۡأَوَّلُونَ مِنَ ٱلۡمُهَٰجِرِينَ وَٱلۡأَنصَارِ وَٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُم بِإِحۡسَٰنٖ رَّضِيَ ٱللَّهُ عَنۡهُمۡ وَرَضُواْ عَنۡهُ وَأَعَدَّ لَهُمۡ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي تَحۡتَهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدٗاۚ ذَٰلِكَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ ١٠٠
तथा सबसे पहले (ईमान की ओर) आगे बढ़ने वाले मुहाजिरीन44 और अंसार और जिन लोगों ने नेकी के साथ उनका अनुसरण किया, अल्लाह उनसे प्रसन्न हो गया और वे उससे प्रसन्न हो गए तथा उसने उनके लिए ऐसी जन्नतें तैयार कर रखी हैं, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। वे उनके अंदर हमेशा रहेंगे। यही बड़ी सफलता है।
फ़ुटनोट
44 इससे अभिप्राय वे मुहाजिरीन हैं जो मक्का से हिजरत करके ह़ुदैबिया की संधि सन् 6 हिजरी से पहले मदीना आ गए थे। और प्रथम आगे बढ़नेवाले अंसार मदीना के वे मुसलमान हैं जो मुहाजिरीन के सहायक बने और ह़ुदैबिया में उपस्थित थे। (इब्ने कसीर)
तफ़सीर
जिन लोगों ने सबसे पहले ईमान लाने में जल्दी की, चाहे वे मुहाजिरीन हों, जो अपना घर और देश छोड़कर अल्लाह की ओर निकल पड़े, या अंसार, जिन्होंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मदद की, तथा वे लोग जिन्होंने अक़ीदा, कथनों और कर्मों में अच्छाई के साथ ईमान की ओर पहल करने वाले मुहाजिरीन और अंसार का अनुसरण किया - अल्लाह इन सभी लोगों से खुश हो गया और उनकी आज्ञाकारिता को स्वीकार कर लिया, तथा वे लोग भी उससे प्रसन्न हो गए, क्योंकि उसने उन्हें अपना महान प्रतिफल प्रदान किया और उनके लिए ऐसी जन्नतें तैयार कर रखी हैं, जिनके महलों के नीचे नहरें बहती हैं, जिनमें वे सदैव रहने वाले हैं। यह बदला ही महान सफलता है।