مَآ أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٍ إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۗ وَمَن يُؤۡمِنۢ بِٱللَّهِ يَهۡدِ قَلۡبَهُۥۚ وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ ١١
कोई भी विपत्ति नहीं पहुँची परंतु अल्लाह की अनुमति से। तथा जो अल्लाह पर ईमान7 लाए, वह उसके दिल को मार्गदर्शन प्रदान करता8 है। तथा अल्लाह प्रत्येक वस्तु को भली-भाँति जानने वाला है।
फ़ुटनोट
7 अर्थ यह है कि जो व्यक्ति आपदा को यह समझ कर सहन करता है कि अल्लाह ने यही उस के भाग्य में लिखा है।
8 ह़दीस में है कि ईमान वाले की दशा विभिन्न होती है। और उसकी दशा उत्तम ही होती है। जब उसे सुख मिले, तो कृतज्ञ होता है। और दुख हो, तो सहन करता है। और यह उसके लिए उत्तम है। (मुस्लिम : 2999)
तफ़सीर
किसी को उसकी जान, या उसके धन, या उसकी संतान में जो भी विपत्ति पहुँचती है, वह अल्लाह के निर्णय और उसकी नियति के अनुसार होती है। और जो अल्लाह, उसके निर्णय और उसकी नियति पर ईमान लाएगा, अल्लाह उसके दिल को अपने आदेश के आगे समर्पण करने तथा अपने निर्णय से संतुष्ट होने की तौफ़ीक़ प्रदान करेगा। और अल्लाह हर वस्तु को भली-भाँति जानता है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है।