सूरह Ash-Shura, आयत 11

42:11

فَاطِرُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ جَعَلَ لَكُم مِّنۡ أَنفُسِكُمۡ أَزۡوَٰجٗا وَمِنَ ٱلۡأَنۡعَٰمِ أَزۡوَٰجٗا يَذۡرَؤُكُمۡ فِيهِۚ لَيۡسَ كَمِثۡلِهِۦ شَيۡءٞۖ وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡبَصِيرُ ١١

(वह) आकाशों तथा धरती का रचयिता है। उसने तुम्हारे लिए तुम्हारी अपनी ही जाति से जोड़े बनाए तथा पशुओं से भी जोड़े। वह तुम्हें इसमें फैलाता है। उसके जैसी9 कोई चीज़ नहीं और वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है।

फ़ुटनोट

9 अर्थात उसके अस्तित्व तथा गुण और कर्म में कोई उसके समान नहीं है। भावार्थ यह है कि किसी व्यक्ति या वस्तु में उसका गुण या कर्म मानना या उसे उसका अंश मानना, असत्य तथा अधर्म है।

तफ़सीर

अल्लाह ही आकाशों तथा धरती का बिना किसी पूर्व उदाहरण के रचयिता है। उसने तुम्हारे लिए तुम्हारी अपनी सहजाति से जोड़े बनाए, और तुम्हारे लिए ऊँट, गाय और बकरी के भी जोड़े बनाए। ताकि तुम्हारे लिए उनका प्रजनन होता रहे। उसने तुम्हारे लिए जो जोड़े बनाए हैं उनके मिलाप से वह तुम्हें पैदा करता (तुम्हारी नस्ल बढ़ाता) है, तथा उसने तुम्हारे लिए जो चौपाए बनाए हैं उनके मांस और दूध से तुम्हारे जीवन यापन का प्रबंध करता है। उसकी मख़्लूक़ात में से कोई भी उसके समान नहीं है। तथा वह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कामों को देखने वाला है। इनमें से कोई चीज़ उससे नहीं छूटती है। और वह उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा; यदि अच्छा है तो अच्छा बदला और यदि बुरा है तो बुरा बदला।