सूरह Ash-Shu'ara, आयत 5

26:5

وَمَا يَأۡتِيهِم مِّن ذِكۡرٖ مِّنَ ٱلرَّحۡمَٰنِ مُحۡدَثٍ إِلَّا كَانُواْ عَنۡهُ مُعۡرِضِينَ ٥

और जब भी 'रह़मान' (अति दयावान्) की ओर से उनके पास कोई नई नसीहत आती है, तो वे उससे मुँह फेरने वाले होते हैं।

तफ़सीर

जब भी इन मुश्रिकों के पास 'रहमान' की ओर से कोई नई नसीहत आती है, जो उसके एकेश्वरवाद और उसके नबी की सच्चाई को इंगित करने वाले प्रमाणों पर आधारित होती है, तो वे उसे सुनने तथा उसे सच्चा मानने से मुँह फेर लेते हैं।