सूरह Ash-Shu'ara, आयत 225

26:225

أَلَمۡ تَرَ أَنَّهُمۡ فِي كُلِّ وَادٖ يَهِيمُونَ ٢٢٥

क्या आपने नहीं देखा कि वे प्रत्येक वादी में भटकते फिरते42 हैं।

फ़ुटनोट

42 अर्थात कल्पना की उड़ान में रहते हैं।

तफ़सीर

और क्या (ऐ रसूल!) आपने नहीं देखा कि उनकी गुमराही की निशानियों में से एक यह है कि वे हर वादी में भटकते फिरते हैं। कभी प्रशंसा की वादी में सिर मारते हैं, तो कभी निंदा की वादी में, और कभी इन दोनों के अलावा किसी और वादी में।