فَأَخَذَهُمُ ٱلۡعَذَابُۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ ١٥٨
तो उन्हें यातना ने पकड़ लिया। निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।
तफ़सीर
अंततः उन्हें उस यातना ने पकड़ लिया, जिसका उन्हें वादा किया गया था, जो भूकंप और तेज़ चीख थी। सालेह तथा उसकी जाति की इस कहानी में सीख ग्रहण करने वालों के लिए निश्चय बड़ी सीख है। तथा उनमें से अधिकतर ईमान लाने वाले नहीं थे।