सूरह Ash-Shu'ara, आयत 157

26:157

فَعَقَرُوهَا فَأَصۡبَحُواْ نَٰدِمِينَ ١٥٧

तो उन्होंने उसकी कूँचें काट दीं, फिर पछताने वाले हो गए।

तफ़सीर

सो वे उसकी हत्या करने पर सहमत हो गए और उनमें से सबसे अभागे व्यक्ति ने उसे मार डाला। फिर वे अपने किए पर पछताने लगे, जब उन्हें पता चला कि यातना अनिवार्य रूप से उनपर आने वाली है। लेकिन यातना देख लेने के समय पछताने से कोई लाभ नहीं होता।