وَقَدۡ خَابَ مَن دَسَّىٰهَا ١٠
तथा निश्चय वह विफल हो गया, जिसने उसे (पापों में) दबा दिया।3
फ़ुटनोट
3 (9-10) इन दोनों आयतों में यह बताया जा रहा है कि अब भविष्य की सफलता और विफलता इस बात पर निर्भर है कि कौन अपनी स्वभाविक योग्यता का प्रयोग किसके लिए कितना करता है। और इस प्रकाशना : क़ुरआन के आदेशों को कितना मानता और पालन करता है।
तफ़सीर
और वह व्यक्ति क्षति में पड़ गया, जिसने अपने आपको अवज्ञाओं और पापों में छिपाकर दबा दिया।