सूरह As-Saffat, आयत 1

37:1

وَٱلصَّٰٓفَّٰتِ صَفّٗا ١

क़सम है पंक्तिबद्ध (फ़रिश्तों) की!

तफ़सीर

मैं उन फ़रिश्तों की क़सम खाता हूँ जो अपनी इबादत में एक दूसरे से मिलकर पंक्तिबद्ध खड़े होते हैं।