وَٱلصَّٰٓفَّٰتِ صَفّٗا ١
क़सम है पंक्तिबद्ध (फ़रिश्तों) की!
तफ़सीर
मैं उन फ़रिश्तों की क़सम खाता हूँ जो अपनी इबादत में एक दूसरे से मिलकर पंक्तिबद्ध खड़े होते हैं।
وَٱلصَّٰٓفَّٰتِ صَفّٗا ١
क़सम है पंक्तिबद्ध (फ़रिश्तों) की!
मैं उन फ़रिश्तों की क़सम खाता हूँ जो अपनी इबादत में एक दूसरे से मिलकर पंक्तिबद्ध खड़े होते हैं।